एक युवक का अजय विष्ट से महंत योगी आदित्यनाथ बनने की कहानी

वर्ष 1990 केंद्र में बीपी सिंह की सरकार बनी जो अल्पमत में थी परंतु उसे ऐसे दो धूर विरोधी दल का समर्थन प्राप्त था जिसकी कल्पना कभी किसी ने नही की थी वो दो दल थे बीजेपी और वामपंथी. बीपी सिंह ने राम मंदिर आंदोलन के नेता और गोरखपुर के मठ के महंत अवैद्यनाथ से कुछ महीनों का समय मांगा और उन्हें भरोषा दिलाया कि 4 महीने में सरकार कुछ ठोस काम करेगी.

लेकिन बीपी सिंह ने महंत अवैद्यनाथ के साथ राजनीति की और उन्हें पता था कि मंदिर आन्दोलन को कम करने के लिए हिन्दू को जातियों में बाँटना पड़ेगा उसके लिए उन्होंने मंडल कमिशन लागू करने का फैसला किया.और कुछ हद्द तक बीपी सिंह सफल भी रहे. अब बीजेपी या कोई पार्टी मंडल कमिशन का विरोध नहीं कर सकती थी क्युकि मंडल कमिशन के विरोध का मतलब है ओबीसी वोट बैंक को नाराज करना.

तो बीजेपी नेता आडवानी ने इसका तोड़ निकाला रामरथयात्रा के रूप में. हलाकि रथयात्रा की तैयारी आडवानी ने जून में ही कर ली थी और उसको सफल बनाने का जिम्मा भाजपा के युवा नेता प्रमोद महाजन को दिया गया था.लेकिन लोगो को लगता है कि आडवानी ने रथ यात्रा मंडल कमिशन के कारण की.

इसी दौरान यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मंदिर आन्दोलन को सांप्रदायिक आन्दोलन कहना चालू किया, साथ ही साथ साधू संत को प्रताड़ित करना, आंदोलनकारियो को परेशान करना चालू हो गया. आन्दोलन कम होने के बजाय तेज होने लगा.हिन्दुओ का राम मंदिर को लेकर आन्दोलन तेज हो गया.

आन्दोलन राजनैतिक सत्ता परिवर्तन का रूप ले चूका था,मुलायम सिंह सरकार में मत्री रहे आजम खान ने चुनौती पूर्ण अंदाज में कहा था कि जो भी बाबरी मस्जिद की ओर आँख उठा के देखेगा उसकी आँख बाहर निकाल लिया जाएगा. महंत अवैद्यनाथ ने हिन्दू विरोधी राजनीति के जवाब में 5 अक्टूबर 1990 को राम भक्तो की विशाल रैली का आह्वाहन किया. आन्दोलन तेजी पकड़ चूका था, महंत को गिरफ्तार करने का प्लान बनाया गया.

26 अक्टूबर को मुलायम सरकार ने दिल्ली से लौटते वक्त रेलगाड़ी रुकवा कर महंत अवैद्यनाथ को गिरफतार कर लिया गया.उनकी गिरफ़्तारी की खबर सुनते ही जनता और रामभक्तो में हाहाकार मच गया, तमाम सुरक्षा के बावजूद भी 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुच गए. 2 नवम्बर को मुलायम सरकार ने कारसेवको पर गोलिया चलवा दी. बहुत से राम भक्त जख्मी हुए और बहुतो ने तो जान भी गवा दी.

बाद में 15 नवम्बर को अवैद्यनाथ अयोध्या पहुचे और उन्होंने मुलायम सरकार के खिलाफ न्यायिक जांच की मांग की. महंत अवैद्यनाथ ने वहां से ऐलान किया “याचना नहीं अब रण होगा”. शायद इसी अहवाह्न ने उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के अजय नामक युवक को अवैद्यनाथ के पास पंहुचा दिया
योगी ने बाद में कहा भी कि राम मंदिर आन्दोलन तेजी से बढ़ रहा था और मुझे लगा मुझे इसमें लगना चाहिए और मैं महंत जी के पास आ गया.

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