24 Dec : 19 साल पहले, भारत के प्लेन हाईजैक के समय की अनसुनी घटना

24 Dec,1999 उत्तर भारत मे ठंढ चादर फैलाये हुए थी, भारत की एक विमान आईसी 814 पर सवार होकर शाम 4 बजे नेपाल के त्रिभुवन एयरपोर्ट से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरी, कुछ ही देर बाद एक व्यक्ति पायलट के पास गया और उसके कान पर पिस्तौल लगा दिया. अब क्या था सबके चेहरों के रंग उड़ गए. प्लेन हाईजैक हो चुका है पायलट देवीशरण ने लोगो को बताया. अपहरणकर्ताओं ने कहा कि जहाज को पाकिस्तान ले चलो. कैप्टेन ने कहा कि लाहौर तक ले जाने के लिए ईंधन नही है. चूकि प्लेन दिल्ली के लिए उड़ी थी आतंकी ने कहा दिल्ली के जगह कही और ले चलो. प्लेन ने रास्ता मोड़ा और चल दिए अमृतसर, कैप्टन फ्लाइट को धीमी रफ्तार से ले जा रहे थे ताकि अमृतसर में जरूरी व्यवस्था सरकार के तरफ से हो सके.

उसी समय आसमान में एक और विमान था वायुसेना का खास विमान जिसमे भारत के प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी लखनऊ से दिल्ली आ रहे थे उस समय विमान में सैटेलाइट फ़ोन की सुविधा नही होने के कारण पीएम को लगभग डेढ़ घंटे तक पता ही नहीं चल पाया था कि कैसा आफत आने वाला है. जब दिल्ली पहुचे तो बिमान के नीचे सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा को देख कर वाजपेयी को हैरानी हुई फौरन जहाज से उतरे तो मिश्रा ने उन्हें जानकारी दी. प्रधानमंत्री का काफिला तेजी से प्रधानमंत्री आवास की ओर दौड़ा.

प्लेन 45 मिनट तक अमृतसर में खड़ा रहा परंतु कोई फैसला नहींहो पा रहा था इसके वजह से अपहरणकर्ताओं ने बिना तेल भरे उड़ने को कहा जहाज उड़ने लगी. तभी पंजाब पुलिस के प्रमुख ने कहा “मैं केपीएस गिल नही हूँ जो फैसला खुद से ले सकता हूँ मैं आदेश का इंतजार कर रहा हूँ, आदेश आने पर ही बोलूंगा”.

आडवाणी अपने नॉर्थब्लॉक के ऑफिस में जरूरी फ़ाइल निपटा रहे थे तब तक आईबी चीफ का फ़ोन आया “सर नेपाल से दिल्ली आने वाली अपनी प्लेन को हाईजैक कर लिया है”. आडवाणी को मानो अचानक से झटका लग गया हो.

जहाज अमृतसर से उड़कर पाकिस्तान पहुच चुकी थी,और लाहौर एयरपोर्ट के ऊपर उड़ रही थी.पाकिस्तानी अधिकारी नही चाहते थे कि जहाज उनके पास उतरे क्योंकि कुछ ही समय पहले कारगिल हुआ था. एयरपोर्ट की लाइट बन्द कर दिया गया पर प्लेन में ईंधन न होने के कारण कैप्टेन के पास कोई विकल्प नही था जिसके कारण वो अंदाज पर प्लेन उतारने की कोसिस करने लगा तो जब नजदीक गया तो देखा कि ये रोड है सहयोगी पायलट ने चेताया, पाकिस्तानी अधिकारियों ने एमरजेंसी को समझा और एयरपोर्ट की लाइट ऑन की गई फिर जहाज उतरा और इंधन भर लिया गया. एस दुलत जो कि उस समय रॉ चीफ थे, उन्होंने बताया कि जहाज ईंधन के साथ में एक बैग भरकर हथियार भी गया था.

अपहरणकर्ताओं ने जहाज को काबुल ले जाने को कहा परंतु रात को लैंडिंग संभव न होने के कारण दुबई ले जाया गया परंतु अधिकारियों ने शुरुआती समय मे लैंडिंग की इजाजत नही दी फिर जसवंत सिंह के बात करने पर इजाजत मिली तबतक भारत ने कमांडो आपरेशन की तैयारी कर ली थी पर लोकल सरकार ने मदद नही की.

प्रधानमंत्री की चिन्ताएं लागातार बढ़ती जा रही थी, वो बार-बार यात्रियों का हाल जानने को बेचैन थे.अगले दिन प्रधानमंत्री का जन्मदिन था जगह जगह तैयारियां थी सबको रद्द करने का फरमान भेज दिया गया था.आतंकियों ने भारत के विभिन्न जेलो में बंद 35 आतंकी छोड़ने को कहा नही तो जहाज उड़ा देंगे ऐसा धमकी दिया गया.

फिर भारत की ओर से 3 अधिकारियों को कंधार भेजा गया जिनमे विवेक काटजू,अजित डोवाल और सी.डी. सहाय मौजूद थे. अपहरणकर्ताओं ने बातचीत के दौरान मौलाना को छोड़ने की बात कही, ऑफिसर लोगो को पता ही नही था कि कौन मौलाना. फिर बताया गया कि 3 लोगो को छोड़ दो.

1. मौलाना मसूद अजहर मुजाहिदीन का मुखिया जो 1994 से जम्मू के जेल में था.
2. उमर सेख जो कि लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स का छात्र रहा था. 4 पर्यटकों का अपहरण करके उन्हें सहारणपुर में छिपा रखा था , उसका मास्टर माइंड था.
3. और अंतिम था मुस्ताक जरगर, ये एक कश्मीरी आतंकी था जिसपर अब तक 40 हत्या के आरोप थे.

इधर जनता बेकाबू हो रही थी, यात्रियों के रिस्तेदार को वाजपेयी ने दिल्ली बुलाया था. उनको कोई समझाने को तैयार नही था फिर एक सरप्राइज विजिटर आयी वो थी स्क्वार्डन लीडर अजय आहूजा की पत्नी जो कारगिल में शहीद हुए थे पर लोगो को समझा पाती लोगो ने उनको भला बुरा कहा. परिजनों को समझाने का ये प्रयास भी विफल रहा.

अंत मे 3 लोगो को छोड़ा गया,जब भारतीय अधिकारी जम्मू पहुचे उस समय के मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने बहुत गुस्सा किया कि आखिर क्यों हम आतंकियों को छोड़ दे. यहाँ तक कि वो अपना इस्तीफा देने राज्यपाल के पास गए, फिर राज्यपाल ने समझा के वापस भेजा. फिर 3 आतंकी को छोड़ा गया और भारतीय लोग वापस आ सके. 192 घण्टे के बाद वाजपेयी ने चैन की सांस ली थी. बहुत लोग आतंकियों को छोड़ने के लिए वाजपेयी सरकार की आलोचना करते है. पर आप खुद से पूछिए क्या ऑप्शन था?

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